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बैंक जमा टूल
फॉर्मूला ऑडिट · 2026-09-20

FD Calculator: फिक्स्ड डिपॉजिट की मैच्योरिटी रकम

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले तिमाही चक्रवृद्धि ब्याज, मैच्योरिटी मूल्य और प्रभावी वार्षिक यील्ड की सटीक व पारदर्शी गणना।

एफडी विवरण दर्ज करें:

सीमा: ₹1,000 - ₹10,00,00,000
₹

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की जाने वाली कुल एकमुश्त रकम।

सीमा: 1% - 15%
%

विभिन्न बैंकों की दरें अलग होती हैं; अपनी बैंक दर दर्ज करें।

सीमा: 1 वर्ष - 20 वर्ष
वर्ष

वह समय जिसके लिए एफडी लॉक की जा रही है।

भारतीय वाणिज्यिक बैंक सामान्यतः तिमाही चक्रवृद्धि सूत्र का उपयोग करते हैं।

एफडी परिणाम बहीखाता:

जमा मूलधन (Principal):₹1,00,000
(1.00 लाख)
कुल अर्जित ब्याज (Total Interest):+₹41,478
(41.5 हज़ार)
कुल मैच्योरिटी राशि (Maturity Amount):₹1,41,478कुल: 1.41 लाख
अनुपात29% लाभ
मूलधन (Principal):₹1,00,000
अर्जित ब्याज (Interest):₹41,478

वर्षवार विवरण तालिका (Year-by-Year Growth Table)

कुल अवधि: 5 वर्ष
निवेश की सालाना वृद्धि, जमा की गई राशि और साल के अंत में कुल कॉर्पस का विवरण।
वर्ष (Year)मूलधन (₹)वार्षिक अर्जित ब्याज (₹)कुल निवेश (Cumulative)वर्ष के अंत में कुल बैलेंस (₹)
वर्ष 1₹1,00,000+₹7,186₹1,00,000₹1,07,186
वर्ष 2₹0+₹7,702₹1,00,000₹1,14,888
वर्ष 3₹0+₹8,256₹1,00,000₹1,23,144
वर्ष 4₹0+₹8,849₹1,00,000₹1,31,993
वर्ष 5₹0+₹9,485₹1,00,000₹1,41,478

DICGC ₹5 लाख बीमा सुरक्षा, RBI नियम और टीडीएस (TDS)

आरबीआई बीमा गारंटी

₹5,00,000 तक 100% सुरक्षित

आरबीआई की सहायक कंपनी (DICGC) प्रत्येक शेड्यूल्ड बैंक में आपके मूलधन और ब्याज को मिलाकर कुल ₹5 लाख तक की सुरक्षा प्रदान करती है।

DICGC आधिकारिक पोर्टल व बैंक सूची (dicgc.org.in) ↗
धारा 194A टीडीएस सीमा

₹40,000 / ₹50,000 ब्याज पर TDS

सालाना ब्याज ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों हेतु ₹50,000) से अधिक होने पर बैंक 10% TDS काटता है। फॉर्म 15G/15H से छूट पाई जा सकती है।

आयकर विभाग धारा 194A वैधानिक नियम ↗
RBI मास्टर डायरेक्शन

आरबीआई जमा ब्याज दर मास्टर डायरेक्शन (DBR.No.Dir.BC.10/13.03.00/2015-16)

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंकों के लिए निर्धारित सांविधिक निर्देश, जिसके तहत फिक्स्ड डिपॉजिट और टर्म डिपॉजिट पर तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) ब्याज की अनिवार्य गणना पद्धति तय की गई है।

RBI मास्टर डायरेक्शन आधिकारिक दस्तावेज़ देखें (rbi.org.in) ↗

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Q&A)

1. बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) कैसे जुड़ता है?

आरबीआई के नियमों के अनुसार अधिकांश भारतीय वाणिज्यिक बैंक (जैसे SBI, HDFC, ICICI) फिक्स्ड डिपॉजिट पर तिमाही आधार पर (Quarterly Compounding) ब्याज जोड़ते हैं। इसका मतलब है कि साल में 4 बार ब्याज मूलधन में जुड़ता है और अगले 3 महीने उस बढ़े हुए बैलेंस पर ब्याज मिलता है।

2. बैंक एफडी पर टीडीएस (TDS) कब और कितना कटता है?

आयकर अधिनियम की धारा 194A के तहत, यदि किसी वित्तीय वर्ष में एक बैंक की सभी शाखाओं से मिलने वाला कुल एफडी ब्याज ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक हो जाता है, तो बैंक 10% की दर से टीडीएस काटता है। यदि पैन कार्ड जमा नहीं है, तो 20% टीडीएस कटता है।

3. फॉर्म 15G और 15H क्या हैं और इन्हें कब जमा करना चाहिए?

यदि आपकी कुल वार्षिक कर योग्य आय शून्य है (यानी टैक्स स्लैब से नीचे है), तो आप बैंक में फॉर्म 15G (60 वर्ष से कम उम्र के लिए) या फॉर्म 15H (60 वर्ष या अधिक के वरिष्ठ नागरिकों के लिए) जमा करके एफडी ब्याज पर टीडीएस कटने से रोक सकते हैं।

4. क्या बैंक में जमा मेरा सारा पैसा 100% सुरक्षित है?

आरबीआई की सहायक कंपनी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत, प्रत्येक बैंक में प्रति खाताधारक ₹5,00,000 (मूलधन + ब्याज दोनों मिलाकर) तक की जमा राशि 100% बीमा-सुरक्षित (Insured) होती है।

5. क्यूमुलेटिव (Cumulative) और नॉन-क्यूमुलेटिव (Non-Cumulative) एफडी में क्या अंतर है?

क्यूमुलेटिव एफडी में ब्याज हर तिमाही री-इन्वेस्ट होकर अंत में एकमुश्त मैच्योरिटी पर मिलता है (चक्रवृद्धि का अधिकतम लाभ)। नॉन-क्यूमुलेटिव एफडी में ब्याज हर महीने या तिमाही आपके बैंक खाते में पे-आउट के रूप में ट्रांसफर कर दिया जाता है (पेंशनभोगियों के लिए उपयुक्त)।